यमकेश्वर के अरविन्द पयाल ने मुर्गी पालन को बनाया स्वरोजगार का जरिया, गांव में पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल
यमकेश्वर। पहाड़ों में रोजगार की तलाश में पलायन के बीच कई युवा अपने गांव में रहकर स्वरोजगार की नई राह तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में यमकेश्वर ब्लॉक के अरविन्द पयाल ने मुर्गी पालन को अपना व्यवसाय बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है।

अरविन्द पयाल ने छोटे स्तर से मुर्गी पालन की शुरुआत की और इसे अपनी आजीविका का साधन बनाया। उनका उद्देश्य गांव में रहकर मेहनत के बल पर रोजगार खड़ा करना और अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है।
मुर्गी पालन जैसे व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में कम संसाधनों के साथ शुरू किए जा सकते हैं और इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अरविन्द का प्रयास स्थानीय युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन रहा है।
उन्होंने बताया कि पहाड़ों में संसाधनों की कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ सही सोच और मेहनत की। अगर युवा खेती और पशुपालन जैसे क्षेत्रों से जुड़ें तो गांव में रहकर भी अच्छी आजीविका बनाई जा सकती है।
अरविन्द पयाल की यह पहल यह संदेश देती है कि स्वरोजगार के जरिए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर की जा सकती है, बल्कि पलायन को रोकने में भी योगदान दिया जा सकता है।
