अशारोड़ी से मियांवाला एलिवेटेड रोड : भवनों पर लगने लगे लाल निशान
देहरादून (रविंद्र थलवाल): आशारोड़ी से मियांवाला तक एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए परियोजना की जद में आने वाले भवनों पर लाल निशान लगने शुरू हो गए हैं। इसमें 15 मोहल्लों के 200 से ज्यादा भवन में जद में आ सकते हैं। इसमें कुछ पूरी तरह से तो कुछ आंशिक रूप से होंगे। दो हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना में एक हजार करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च होने हैं।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे आशारोड़ी पर आकर खत्म होता है। वहां से आगे फोरलेन सड़क तो है, लेकिन सड़क के दोनों ओर घना आबादी क्षेत्र और कई चौराहे होने के कारण यातायात बार-बार थम जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी रिस्पना से जोगीवाला के बीच होती है। जाम की समस्या के समाधान के लिए एनएचएआई अब आशारोड़ी से मियांवाला तक 13 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाने जा रहा है। इसकी दो हजार करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी गई है।

इसके साथ ही परियोजना की जद में आने वाली भूमि का सीमांकन शुरू हो गया है। आशारोड़ी से अजबपुर तक नई एलिवेटेड रोड पुरानी रोड के ऊपर बनेगी। यहां दोनों तरफ कुछ जगहों पर एक तो कुछ जगहों पर दो मीटर जमीन अधिग्रहित करनी पड़ेगी, लेकिन अजबपुर से मियांवाला तक नई सड़क बननी है। पांच किलोमीटर लंबे इस हिस्से के लिए 23 मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें ज्यादातर निजी संपत्तियां हैं, जिनमें कुछ प्लॉट तो कुछ लोगों के मकान और दुकानें हैं। इसके अलावा कुछ जमीन रेलवे और कुछ राज्य सरकार की है।
इन क्षेत्रों में अधिग्रहित होगी भूमि
परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने भूमि अर्जन की कार्रवाई तेज कर दी है। इसके तहत देहराखास, सेवला खुर्द, बद्रीपुर, ब्राह्मणवाला, माजरा, माजरीमाफी, मोहब्बेवाला, मोहकमपुर खुर्द, शाहनगर, कारगी ग्रांट, अजबपुर कलां, अजबपुर खुर्द, चक अजबपुर खुर्द, चकशाहनगर और तालुक देहरादून समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण किया जाना है।
एलिवेटेड रोड के विरोध में एकजुट हुए लोग
एलिवेटेड रोड निर्माण से प्रभावित होने वाले लोगों का आक्रोश चरम पर है। रिहायशी मकानों पर लाल निशान लगाए जाने से भड़के लोगों ने ‘संघर्ष समिति’ का गठन कर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने भूमि अधिग्रहण के नोटिफिकेशन को तुरंत रद्द करने की मांग की है। स्थानीय निवासी दिनेश चंद्र पंत, केशव प्रसाद अवस्थी, एस.आर. जायसवाल, गजेंद्र नेगी, सुशील कुमार और नयन सिंह का कहना है कि इस फैसले से हजारों परिवार बेघर होने की कगार पर आ गए हैं। उन्होंने इस परियोजना को रद्द करने की मांग की है।
