यमकेश्वर। पर्वतीय क्षेत्र यमकेश्वर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र की बड़ी ग्रामीण आबादी आज भी बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के साथ-साथ आवश्यक जांच, दवाइयों और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर है। डॉक्टरों की कमी के चलते कई मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। सामान्य बीमारी के इलाज के लिए भी लोगों को दूसरे शहरों या बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ता है।
पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और भी जरूरी हो जाती है। आपात स्थिति में मरीज को दूर-दराज के अस्पताल तक ले जाना कई बार चुनौतीपूर्ण साबित होता है। ऐसे में स्थानीय अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, जरूरी दवाइयां, पैथोलॉजी जांच और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद डबराल का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। जनता चाहती है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि मरीजों को इलाज के लिए क्षेत्र से बाहर न जाना पड़े।
अब सवाल यह है कि यमकेश्वर की स्वास्थ्य व्यवस्था आखिर कब सुधरेगी? क्या अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर होगी और ग्रामीणों को उनके क्षेत्र में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएंगी?
स्वास्थ्य सेवा किसी भी क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत है। यमकेश्वर की जनता भी समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा की हकदार है। ऐसे में जरूरत सिर्फ आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की है।
